टॉपर बेटा फ्रॉड को नहीं पहचान पाया… अयोध्या में ब्लैकमेलिंग के शिकार छात्र की मौत | खबरी भैया
"मेरा बेटा टॉपर था… लेकिन फ्रॉड को नहीं पहचान पाया!"
अयोध्या से आई ये खबर किसी फिल्मी कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन ये हकीकत है — एक बाप की चीख, एक बेटे की चुप मौत… और सिस्टम का सोता हुआ कानून।
अयोध्या के जनौरा में रहने वाले रूपेश कुमार सिंह ने अपने इकलौते बेटे उत्कर्ष सिंह को खो दिया।
24 जुलाई को उत्कर्ष ने ज़हर खा लिया था, और 25 जुलाई को लखनऊ के चंदन हॉस्पिटल में उसकी मौत हो गई।
रूपेश सिंह का आरोप है कि उनके बेटे को कुछ साइबर स्कैमर्स ने ब्लैकमेल किया।
जब वो खुद 23 जुलाई को जयपुर गए थे अपने मित्र के बेटे का एडमिशन कराने, उसी दौरान स्कैमर्स ने उत्कर्ष को टारगेट किया और ₹10 लाख की मांग की।
28 जुलाई को उत्कर्ष के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फिर व्हाट्सएप कॉल आई।
जब कॉल करने वाले को बताया गया कि उत्कर्ष अब इस दुनिया में नहीं है, तो वो नंबर बंद कर दिया गया।
जांच में जो बातें सामने आईं वो और भी चौंकाने वाली हैं:
- एक शख्स रुद्रमणि त्रिपाठी लगातार उत्कर्ष को कॉल करता रहा
- ₹37,000 की राशि रितिक राठौर / श्री जी इंटरप्राइजेज के खातों में ट्रांसफर हुई
- कई बैंकों में लोन और क्रेडिट कार्ड के आवेदन भी किए गए थे
रूपेश सिंह का कहना है कि उनका बेटा टॉपर था, मजबूत था, लेकिन साइबर फ्रॉड की इस चाल को नहीं समझ पाया।
अब उन्होंने प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
🔴 खबरी भैया की अपील:
यह सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं है।
ये चेतावनी है हर उस परिवार के लिए, जिनके बच्चे आज इंटरनेट और मोबाइल की दुनिया में हैं।
✍️ खबरी भैया टीम की ओर से उत्कर्ष को श्रद्धांजलि।
🙏 और सभी से अपील — जागिए, बच्चों को समझाइए, और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाइए।
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