वनटांगिया मजदूरों के बीच मनाई जाने वाली योगी आदित्यनाथ जी की दीपावली

वनटांगिया मजदूरों के बीच मनाई जाने वाली योगी आदित्यनाथ जी की दीपावली

28 वर्षों से जारी है यह परंपरा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देश में एक कठोर प्रशासक और सख्त निर्णय लेने वाले नेता के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक संवेदनशील और मानवीय पक्ष भी है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। यह पहलू हर साल गोरखपुर के वनटांगिया मजदूरों के बीच मनाई जाने वाली दीपावली में दिखाई देता है। यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि लगातार 28 वर्षों से चल रही है।

कौन हैं वनटांगिया?

वनटांगिया वो मजदूर समुदाय है, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौर में जंगलों की बागवानी, पेड़ लगाने और जंगलों की देखभाल के लिए बसाया गया था। सालों तक ये लोग जंगलों में बसे रहे, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में इनका अस्तित्व नहीं था।
न बिजली, न सड़क, न पानी, न स्कूल ये लोग भारत में रहकर भी “राज्यविहीन नागरिक” जैसे थे।

योगी आदित्यनाथ जी का पहला जुड़ाव
जब योगी आदित्यनाथ जी गोरखनाथ मंदिर के महंत के रूप में उत्तराधिकारी घोषित हुए, तब उन्हें इन समुदायों की स्थिति के बारे में पता चला।
इस दौरान उन्होंने:
लगातार जंगलों में जाकर लोगों की समस्याएँ सुनीं, उनकी नागरिकता और पहचान के लिए लड़ाई लड़ी, और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लंबा संघर्ष किया।

योगी जी के प्रयासों से गाँवों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला, बिजली के कनेक्शन पहुंचे, सड़कें बनीं, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना हुई,
और आज ये लोग भारत के आम नागरिकों की तरह सभी सरकारी योजनाओं के हकदार हैं।
क्यों मनाते हैं योगी जी इनके साथ दीपावली?

कई साल पहले वनटांगिया मजदूरों ने योगी जी से कहा था:
 “महाराज, दुनिया अपने-अपने घर में दीपावली मनाती है, पर हमारा घर तो आप ही हैं।”

तब से हर साल दीपावली के दिन योगी आदित्यनाथ सबसे पहले इन्हीं परिवारों के पास पहुँचते हैं।
बच्चों को टॉफियाँ और मिठाइयाँ
परिवारों को कपड़े, पटाखे और दीपावली सामग्री
बुजुर्गों को ज़रूरी समान भेंट करते हैं।
इसी वजह से बच्चे उन्हें “टॉफी वाले बाबा” कहते हैं और प्रेम से इंतज़ार करते हैं।

मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं टूटी परंपरा
सीएम बनने के बाद भी यह कार्यक्रम कभी नहीं रुका।
सुरक्षा, व्यस्त कार्यक्रम, शासन की ज़िम्मेदारियाँ 
इन सबके बावजूद योगी आदित्यनाथ हर दीपावली रात कुछ समय वनटांगिया मजदूरों के बीच अवश्य बिताते हैं।

क्यों है यह परंपरा खास?
यह केवल दया या औपचारिकता नहीं,
बल्कि समरसता, संबंध और अपनापन का उदाहरण है।

जहाँ अधिकांश नेता चमकदार और शहरी आयोजनों में त्योहार बिताते हैं,
वहीं योगी जी दूर जंगलों में रहने वाले उन लोगों के बीच दीप जला रहे हैं,
जिन्होंने वर्षों तक उपेक्षा झेली है।
योगी आदित्यनाथ जी महाराज का यह दीपावली उत्सव यह साबित करता है कि नेतृत्व केवल सत्ता चलाने का नाम नहीं है,
बल्कि उन लोगों तक रोशनी पहुँचाने का भी नाम है,
जिन तक अब तक रोशनी पहुँची ही नहीं थी।

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