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खबरी भैया की खास रिपोर्ट जौनपुर में गर्मी कम, जाम ज़्यादा! हर चौराहा बोले — निकल सके तो निकल जौनपुर: खबरी भैया इस समय जिले में पारा आसमान छू रहा है, लेकिन उससे बड़ी तपिश जाम ने पैदा कर रखी है। ऐसा लगता है कि शहर की पहचान अब जाम बन गई है। ऑटो, ई-रिक्शा, प्राइवेट बसें, होटल-हॉस्पिटल की गाड़ियां, और ऊपर से फुटपाथ पर दुकानें — सब मिलकर जौनपुर की सड़कों को एक मोबाइल जेल में बदल चुके हैं। हर मोड़ पर 'ट्रैफिक ट्रैप' जौनपुर में आपको किसी कोचिंग, दफ्तर, बाजार या स्कूल जाना हो — पहले अपने भाग्य की पूजा कर लीजिए। क्योंकि हर तिराहा-चौराहा जाम की ऐसी परीक्षा लेता है, जिससे निकलना ही टैलेंट का असली टेस्ट है। गर्मी से नहीं, जाम से पसीना 35-40 डिग्री तापमान में गाड़ियों की कतारें, हॉर्न का शोर और धूल-धुआं... हालत यह है कि लोग कह रहे हैं — "गर्मी तो सह लेंगे, लेकिन इस जाम से कैसे निपटें?" 'खुदकिस्मत' हैं जो जाम से निकल गए खुदा की कसम, अगर आप किसी दिन बिना जाम में फंसे एक चौराहे से निकल जाएं — तो समझिए आप पर ऊपरवाले की खास कृपा है। वरना लोग पूछते मिलेंगे — "भाई साहब, आप कोचिंग जा रहे थे या जाम दर्शन को?" प्रशासन मौन, जनता परेशान सड़क किनारे कब्जे, अव्यवस्थित पार्किंग और बिना नियम के चल रहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। न प्लानिंग, न एक्शन — और भुगतना सिर्फ आम जनता को पड़ रहा है। --- खबरी भैया बोले: "जौनपुर में जाम अब सड़क पर नहीं, दिमाग पर चढ़ता है। कोई तो बताए — कब खुलेगी इस ट्रैफिक की गांठ?"

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