कोटा में बढ़ते स्टूडेंट्स सुसाइड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार को लगाई फटकार
लेखक: खबरी भैया टीम
प्रकाशन तिथि: 23 मई, 2025
नई दिल्ली/कोटा। देशभर में बढ़ते स्टूडेंट्स सुसाइड के मामलों को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में हो रही आत्महत्या की घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सरकार से पूछा कि अब तक इन घटनाओं को रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
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2023 में रिकॉर्ड 26 स्टूडेंट्स सुसाइड
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में कोटा में रिकॉर्ड 26 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। वहीं, 2024 में अब तक (मई तक) 8 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं।
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मानसिक दबाव और प्रतियोगिता बनी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, कोटा की कोचिंग संस्कृति छात्रों पर असहनीय मानसिक दबाव बनाती है। ज़्यादातर छात्र 14 से 20 वर्ष की आयु के होते हैं जो परिवार से दूर रहकर कठोर दिनचर्या में जीते हैं, जिससे वे तनाव और अवसाद में चले जाते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने कहा:
"ये केवल आंकड़े नहीं हैं, ये हर एक छात्र का जीवन है, जो हम सबकी सामूहिक विफलता का परिणाम है। राज्य सरकार को अब प्रतीकात्मक नहीं, ठोस और वैज्ञानिक उपाय करने होंगे।"
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राजस्थान सरकार का पक्ष
सरकार ने बताया कि कोटा में मानसिक परामर्श केंद्र, हेल्पलाइन और 'नो टेस्ट संडे' जैसे प्रयास चलाए जा रहे हैं। कोर्ट ने इन प्रयासों को अपर्याप्त मानते हुए कोचिंग संस्थानों पर निगरानी की आवश्यकता बताई।
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अभिभावकों और छात्रों की प्रतिक्रिया
छात्रों और अभिभावकों ने कोर्ट की सख्ती का स्वागत किया है। कई अभिभावकों ने मांग की है कि सरकार को कोचिंग सेंटरों के लिए सख्त नियम और निगरानी प्रणाली लागू करनी चाहिए।
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